प्रौद्योगिकी उन्‍नयन एवं उत्‍पादकता वृद्धि


किसी राष्‍ट्र द्वारा अपने व्‍यक्‍तियों पूंजी और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किए गए उत्‍पादन से उसकी प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता का पता चलता है । यह मैक्रो लेवल (सकल घरेलू उत्‍पाद में तुलनात्‍मक रूप से कम हिस्‍सा, रोजगार में वृद्धि और गरीबी कम करने में कम प्रभाव) तथा माइक्रो लेवल (कम उत्‍पादकता,अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धा का अभाव) दोनों स्‍तरों पर स्‍पष्‍ट,है। उद्योग के चयनित क्षेत्रों के लिए वैश्‍विक प्रतिस्‍पर्धा संबंधी अध्‍ययन दर्शाते हैं कि वृद्धि को प्रभावित करने वाले अन्‍य कारकों में संसाधनों का अकुशल प्रयोग जिसके कारण उत्‍पादनों की निम्‍न गुणवत्‍ता के साथ-साथ अस्‍वीकृति के कारण प्रच्‍छन्‍न उच्‍च लागत तथा निर्माण के क्षेत्र में पुन: कार्य,कच्‍चे माल, कार्य प्रगति,निर्मित सामान, अंतिम उत्‍पाद आदि के रूप में विभिन्‍न स्‍तरों पर सूची तैयार करना । इससे पूरे व्‍यापार चक्र में उपयुक्‍त प्रबंधकीय ओर प्रौद्योगिकीय प्रभावों को अपनाकर व्‍यवस्‍थित ढंग से छीजन का पता लगाने तथा उसे दूर करके फर्मों के निष्‍पादन में तेजी से वृद्धि करके उनकी प्रतिस्‍पर्धात्‍मक क्षमता को बढ़ाने का अवसर मिलता है ।

 

     सामान्‍यत: सूक्ष्‍म,लघु एवं मध्‍यम उद्यमों में प्रौद्योगिकीय जानकारी के लिए शोचनीय परामर्शदात्री समर्थन/सेवाओं के कारण  प्रौद्योगिकी तक पहुंच का अभाव, कुशल श्रम शक्‍ति की अनुपलब्‍धता,उत्‍पादन और उत्‍पादन लागत पर बल देने के संबंध में उद्यमियों में जागरूकता का अभाव, प्रबंधकीय कौशल का अभाव तथा व्‍यवसाय,ट्रेंड आदि को न अपना पाना जैसी समस्‍याएं हैं ।

     विकास आयुक्‍त (सू.ल.म.उ.) सूक्ष्‍म एवं लघु उद्यमों को सुदृढ़ बनाने तथा उनमें प्रौद्योगिकीय उन्‍नयन के लिए पूंजीगत सब्‍सिडी तथा अन्‍य सहायता प्रदान करता है । प्रौद्योगिकीय उन्‍नयन तथा उत्‍पादकता में वृद्धि के तहत आने वाली स्‍कीमें उदारीकरण और वैश्‍वीकरण की चुनौतियों का मुकाबला करने में सूक्ष्‍म एवं लघु उद्यमों की सहायता करती हैं ।  प्रौद्योगिकीय उन्‍नयन तथा उत्‍पादकता में वृद्धि के तहत आने वाली स्‍कीमों का ब्‍यौरा निम्‍नुसार है:-

प्रयोजन

स्‍कीम का नाम

नई प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए पूंजीगत सब्‍सिडी

सीएलसीएसएस

प्रतिस्‍पर्धा के द्वारा एमएसएमई को सुदृढ़ बनाना 

एनएमसीपी स्‍कीम

आईएसओ 9000 पुनर्भुगतान स्‍कीम 

एमएसएमई स्‍कीम