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संगठनात्मक संरचना
भारत सरकार का लघु उद्योग मंत्रालय लघु और ग्रामीण उद्योगों से संबंधित सभी मामलों के लिए प्रशासकीय मंत्रालय है। लघु उद्योगों के संवर्धन और अभिवृद्धि के लिए यह अपने फील्ड संगठनों और संबद्ध कार्यालयों के माध्यम से नीतियां और कार्यक्रम बनाता व कार्यान्वित करता है।
विकास आयुक्त (लघु उद्योग) का कार्यालय लघु उद्योग मंत्रालय का एक संबद्ध कार्यालय है और लघु उद्योग क्षेत्र के विकास तथा संवर्धन के लिए परामर्श देने, समन्वय करने और नीतियां व कार्यक्रम बनाने के लिए शीर्ष निकाय है। यह कार्यालय केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य केंद्रीय/राज्य सरकार एजेंसियों/संगठनों तथा वित्तीय संस्थानों से संपर्क भी बनाए रखता है।
संस्थागत नेटवर्क
विकास आयुक्त (लघु उद्योग) लघु उद्योग विकास संगठन के प्रमुख हैं। लघु उद्योग विकास संगठन 30 लघु उद्योग सेवा संस्थानों, 28 शाखा लघु उद्योग सेवा संस्थानों, 4 क्षेत्रीय परीक्षण केंद्रों, 7 फील्ड परीक्षण स्टेशनों, 19 स्वायत्तशासी निकायों जिनमें 10 टूल रूम और टूल डिज़ाइन संस्थान, 4 प्रक्रिया-सह-उत्पाद विकास केंद्र, 2 केंद्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान, 1 इलैक्ट्रॉनिक्स सेवा और प्रशिक्षण केंद्र, 1 इंस्टिट्यूट फॉर डिज़ाइन ऑफ इलैक्ट्रिकल मेज़रिंग इंस्ट्रुमेंट्स, 2 राष्ट्र स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान और 1 विभागीय प्रशिक्षण संस्थान तथा एक उत्पादन केंद्र शामिल हैं, का एक नेटवर्क है।
क्षेत्रीय परीक्षण केंद्र
गुणवत्ता उन्नयन के लिए परीक्षण सुविधाएं प्रदान करते हैं।
परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंध में प्रशिक्षण/परामर्श देते हैं।
गुणवत्ता नियंत्रण सिस्टम आदि का संसाधन करते हैं।
उत्पाद विशिष्ट परीक्षण सुविधाएं फील्ड परीक्षण स्टेशनों द्वारा प्रदान की जाती हैं।
स्वायत्तशासी निकाय
टूल रूम/टूल डिज़ाइन संस्थान
तकनीकी उन्नयन में लघु उद्योगों की सहायता करना, टूल्स, मॉल्ड्स, जिग्स और फिक्सचर, कंपोनेंट आदि की डिज़ाइनिंग और उत्पादन द्वारा बढ़िया गुणवत्ता वाली टूलिंग प्रदान करना।
टूल और डाई मार्करों के लिए प्रशिक्षण तथा परामर्श प्रदान करना।
प्रक्रिया-सह-उत्पाद विकास केंद्र
ये निम्नलिखित के लिए उत्पाद विशिष्ट केंद्र हैं:
उनकी विशिष्ट समस्याओं को देखना और तकनीकी सेवा प्रदान करना।
प्रौद्यागिकी का विकास और उन्नयन।
श्रमशक्ति विकास और प्रशिक्षण।
केंद्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान
प्रशिक्षण संस्थान
निम्नलिखित तीन राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र हैं :-
राष्ट्रीय लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण केंद्र, हैदराबाद
राष्ट्रीय उद्यमशीलता और लघु व्यवसाय विकास संस्थान, नई दिल्ली जो कि विभिन्न क्षेत्रों और विषयों में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
भारतीय उद्यमिता संस्थान, गुवाहाटी। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर को ध्यान में रखते हुए उद्यमिता विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना है।
अनुषंगी विकास के लिए उप-संविदात्मक एक्सचेंज
विपणन समर्थन और निम्नलिखित कार्यों के लिए एक मंच प्रदान करने हेतु कुल 61 उप-संविदात्मक एक्सचेंज हैं:-
लघु उद्योगों की अतिरिक्त उत्पादकता/सेवा क्षमता का पंजीकरण और डाटाबेस तैयार करना
बड़ी/मध्यम इकाइयों की आवश्यकताओं का डाटाबेस तैयार करना और इन आवश्यकताओं को लघु इकाइयों की अतिरिक्त उपलब्ध क्षमता से तुलना करना
बड़ी और लघु इकाइयों में समन्वयन, गुणवत्ता उन्नयन, निर्यात संवर्धन आदि के लिए क्रेता-विक्रेता बैठकों, विक्रेताओं की प्रदर्शनियों, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करना तथा विक्रेता विकास पर आंकड़े उपलब्ध कराना
अन्य संबंधित एजेंसियां
प्रौद्योगिकी और विपणन समर्थन के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक जो विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लघु उद्योग क्षेत्र की ऋण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने तथा समान गतिविधियों में लगे अन्य संस्थानों के क्रियाकलापों में समन्वयन करने के लिए शीर्ष बैंक है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में ग्रामीण तथा पारंपरिक उद्योगों के विकास, संवर्धन और संवितरण में सहायता करता है।
राज्य स्तरीय संस्थागत समर्थन
राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों में लघु उद्योगों के विकास तथा संवर्धन के लिए विभिन्न संवर्धक एवं विकास परियोजनाओं/योजनाओं का क्रियान्वयन करती हैं और अनेक समर्थक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।
इनका क्रियान्वयन राज्य उद्योग निदेशालय के माध्यम से किया जाता है जिनके अधीन केंद्रीय/राज्य स्तरीय योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु जिला उद्योग केंद्र होते हैं।
राज्य औद्योगिक विकास और वित्तीय संस्थान तथा राज्य वित्तीय निगम भी लघु उद्योग क्षेत्र की आवश्यकताओं की देखरेख करते हैं।
लघु उद्योग विकास संगठन नेटवर्क की गतिविधि रिपोर्ट देखें
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